Thursday, August 17, 2017

सूरजमुखी का फूल हमेशा सूरज की तरफ क्यों होता है?

इस प्रवृत्ति को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) और हीलियोट्रॉपिज्म (Heliotropism) कहते हैं. सूरजमुखी के पौधे में ऑक्सिन (Auxin ) नाम का एक हॉरमोन होता है. यह हॉर्मोन सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशील होता है. पौधे में यह तने के छाया वाले हिस्से में जमा होता है. फूल से छाया बनती है. छाया में ही यह बढ़ता है. इसलिए इसका तना सहज रूप से छाया की ओर घूमता है, जिसके कारण फूल का मुख सूरज की ओर हो जाता है.

इसका परागण से भी संबंध है. ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया’ में काम करने वाले छह अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक दल ने पाया है कि तने में एक दिशा में होने वाली चयनात्मक वृद्धि के कारण सूरजमुखी सूर्य की दिशा में देखता है.  सुबह के समय फूल का चेहरा पूर्व की ओर होता है और फिर जिस दिशा में सूर्य बढ़ता जाता है, यह भी उसी दिशा में घूमता जाता है. रात के समय यह विपरीत दिशा में वापस आ जाता है ताकि सुबह एकबार फिर से इसका चेहरा सूर्य की दिशा में हो सके. सिर्फ नए फूल ही इस लय का पालन करते हैं. जब ये बड़े हो जाते हैं और इनके बीज स्थापित हो जाते हैं तो ये फूल हमेशा अपना मुंह पूर्व की दिशा में रखता है. इससे फूल और परागण करने वाले जीवों के बीच होने वाली प्रक्रिया में लाभ मिलता है.  
दुनिया के पहले एटम बम का कोड नाम क्या था?

पहला एटम बम यानी जिस बम का पहला परीक्षण किया गया. उसका नाम था ट्रिनिटी. इसका विस्फोट 16 जुलाई 1945 को अमेरिका की सेना ने सुबह 5.29 बजे किया. 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर जो पहला बम गिराया गया था उसका नाम था लिटिल बॉय. हिरोशिमा पर बमबारी के तीन दिन बाद 9 अगस्त को जापान के दूसरे शहर नगासाकी पर जो बम गिराया गया उसका नाम था फैट मैन. इस बमबारी के बाद जापान ने 15 अगस्त 1945 को समर्पण की घोषणा कर दी.
शक संवत क्या है?

राष्ट्रीय शाके अथवा शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है. इसका प्रारम्भ यह 78 वर्ष ईसा पूर्व माना जाता है. यह संवत भारतीय गणतंत्र का सरकारी तौर पर स्वीकृत अपना राष्ट्रीय संवत है. ईसवी सन 1957 (चैत्र 1, 1879 शक) को भारत सरकार ने इसे देश के राष्ट्रीय पंचांग के रूप में मान्यता प्रदान की थी. इसमें सौर गणना होती है. यानी महीना 30 दिन का होता है. इसे शालिवाहन संवत भी कहा जाता है. इसमें महीनों के नाम विक्रमी संवत जैसे ही हैं. इसके प्रथम माह (चैत्र) में 30 दिन हैं, जो अंग्रेजी लीप ईयर में 31 दिन हो जाते हैं. वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण एवं भाद्रपद में 31-31 दिन एवं शेष 6 मास में यानी आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ तथा फाल्गुन में 30-30 दिन होते हैं.
संसद का ‘शून्यकाल’ क्या होता है?
शून्यकाल भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है. आमतौर पर सदन में प्रश्न प्रहर खत्म होने के बाद शुरू होता है. इसमें कोई भी मामला उठाया जा सकता है. साठ के दशक से शुरू हुई यह व्यवस्था अब हमारी संसदीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बन गई है.
JPG और PNG इमेज में क्या फर्क है?

बुनियादी फर्क उसके फॉर्मेट का है, जिसके कारण PNG इमेज को जब कॉम्प्रेस करते हैं तो डेटा लॉस नहीं होता. यानी चित्र में कुछ फर्क आ जाता है, भले ही उसे आप आसानी से देख न पाएं. इसके विपरीत JPG में कुछ फर्क आ जाता है, पर जटिल चित्रों को भी कॉम्प्रेस करने में JPG ज्यादा कुशल है.  
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Sunday, August 13, 2017

क्या आप जानते हैं कि सुभाष चंद्र बोस का राष्ट्रगान क्या था?

सन 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी और जापान के समर्थन से दक्षिण पूर्व एशिया में आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद यानी स्वतंत्र भारत की कार्यवाहक सरकार की स्थापना की थी. इस सरकार का राष्ट्रगान भी रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जन,गण मन की ध्वनि पर आधारित, पर हिंदी में था. इसे शुभ सुख चैन गान कहा जाता है. इसे कैप्टेन आबिद अली ने लिखा था और इसकी संगीत रचना राम सिंह ने की थी. इसका पहला छंद इस प्रकार था:-

शुभ सुख चैन की बरखा बरसे , भारत भाग है जागा/पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्राविड़ उत्कल बंगा/चंचल सागर, विंध्य, हिमालय, नीला जमुना गंगा/तेरे नित गुण गाएँ, तुझसे जीवन पाएँ/हर तन पाए आशा/सूरज बन कर जग पर चमके, भारत नाम सुभागा/जय हो! जय हो! जय हो! जय जय जय जय हो!

अगस्त क्रांति का मतलब क्या है?

सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन को हम अगस्त क्रांति के नाम से जानते हैं. अगस्त क्रांति आंदोलन की शुरूआत 9 अगस्त 1942 को हुई थी.  द्वितीय विश्व युद्ध में समर्थन लेने के बावजूद जब अंग्रेज़ भारत को स्वतंत्र करने को तैयार नहीं हुए तो महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के रूप में आजादी की अंतिम जंग का ऐलान कर दिया. इसकी शुरूआत 9 अगस्त, 1942 को हुई थी, इसीलिए भारतीय इतिहास में 9 अगस्त के दिन को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में जाना जाता है. इसके पहले 14 जुलाई 1942 को वर्धा में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में प्रस्ताव पास करके ब्रिटिश सरकार से माँग की गई कि वह पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा करे. ऐसा नहीं होने पर जनांदोलन की शुरुआत की जाएगी. इसके बाद 8 अगस्त से मुम्बई में हुए कांग्रेस के महाधिवेशन में अंग्रेजो भारत छोड़ो प्रस्ताव पास करके इस आंदोलन की शुरुआत की गई.

राष्ट्रपति भवन पर पहली बार तिरंगा कब फहराया?

14-15 अगस्त की रात में संसद भवन के सेंट्रल हॉल में तिरंगा फहराया गया. इसी कार्यक्रम में 72 महिलाओं के एक समूह का नेतृत्व करते हुए स्वतंत्रता सेनानी श्रीमती हंसा मेहता ने यह राष्ट्रीय ध्वज संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र प्रसाद को भेंट किया. इसके बाद 15 अगस्त की भोर में इसे वायसरीगल हाउस या वर्तमान राष्ट्रपति भवन के शिखर पर भी फहराया गया. एक जानकारी यह भी है कि 16 अगस्त 1947 को सुबह साढ़े आठ बजे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लालकिले के प्राचीर पर ध्वजारोहण किया था. शेखर चक्रवर्ती की पुस्तक ‘फ्लैग्स एंड स्टैम्प्स’ में लिखा है कि 15 अगस्त 1947 के दिन वायसरीगल लॉज (अब राष्ट्रपति निवास) में जब नई सरकार को शपथ दिलाई जा रही थी तो लॉज के सेंट्रल डोम पर सुबह साढ़े दस बजे आजाद भारत का राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया गया था. 14 अगस्त 1947 की शाम को ही वायसराय हाउस के ऊपर से यूनियन जैक को उतार लिया गया था. इस यूनियन जैक को आज इंग्लैंड के हैम्पशायर में नॉर्मन ऐबी ऑफ रोमसी में देखा जा सकता है. 15 अगस्त 1947 को सुबह छह बजे राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दिए जाने का कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम में पहले समारोहपूर्वक यूनियन जैक को उतारा जाना था लेकिन लॉर्ड माउंटबेटन और पंडित नेहरू के विमर्श से कार्यक्रम में कुछ बदलाव कर दिया गया.
किस देश में स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जाता?

स्वतंत्रता दिवस उसी देश में मनाया जाता है जो कभी परतंत्र रहा हो. यूके, रूस, फ्रांस, नेपाल, थाईलैंड, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे अनेक देश नहीं मनाते. पर ज्यादातर देश किसी न किसी चीज की याद में राष्ट्रीय समारोह मनाते हैं. मसलन फ्रांसीसी क्रांति की याद में बास्तील दिवस मनाया जाता है. चीन 1 अक्तूबर को कम्युनिस्ट शासन की शुरूआत को मनाता है. नेपाल 29 मई 2008 को संप्रभुता सम्पन्न गणतंत्र बना. इस दिन यहाँ से राजशाही का खात्मा हुआ. पर वहाँ लोकतंत्र दिवस हर साल फाल्गुन सप्तमी को मनाया जाता है. इस रोज सन 1951 में राजा त्रिभुवन ने देश को राणाशाही के हाथों से निकाल कर लोकतंत्र की स्थापना की थी. 
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Saturday, August 5, 2017

अंतरिक्ष का मौसम कैसा है, ठंडा या गरम?

धरती और अंतरिक्ष में एक बुनियादी अंतर है. वहाँ वातावरण नहीं होता. यानी जैसे धरती पर चारों और हवा की परत है वैसी हवा वहाँ नहीं होती. धरती पर तापमान को नियंत्रित रखने में हवा की काफी बड़ी भूमिका होती है. अंतरिक्ष में आपका कितना तापमान से सामना होगा, यह आपकी स्थिति पर निर्भर करेगा. यानी आप कहाँ हैं.

यदि आप धरती की कक्षा में हों और चक्कर लगा रहे हों, तो जब आपके ऊपर धूप होगी, तब तापमान 122 डिग्री या इससे ज्यादा हो सकता है. जैसे ही आप घूमकर कक्षा के उस हिस्से में पहुँचेंगे जहाँ से आपके ऊपर धूप नहीं पड़ रही होगी तो तापमान शून्य से 180 डिग्री तक पहुँच जाएगा. यानी धूप हटी तो आप जम जाएंगे.

यह तो पृथ्वी की कक्षा की बात हुई. यदि आप धरती की कक्षा से निकल कर सूर्य की तरफ बढ़ेंगे तो तापमान बढ़कर इतना ज्यादा हो जाएगा कि आप देखते ही देखते स्वाहा हो जाएं. इसके विपरीत यदि आप सूर्य के दूर जाएंगे, तब तापमान घटेगा. प्लूटो के बाद अंतरिक्ष में तापमान 270 डिग्री से भी कम मिलेगा. इस तापमान को अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में कॉस्मिक बैकग्राउंड टेम्परेचर कहा जाता है. यानी अंतरिक्ष का सामान्य तापमान.  

पैराशूट में छेद क्यों होता है?

इसके दो-तीन कारण हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब सबसे पहले पैराशूट बनाए गए, तब उनमें छेद नहीं होता था, वे एकदम वैसे छाते जैसे होते थे, जैसे हमारे बरसात के छाते होते हैं. इसकी वजह से दो खतरे पैदा होने लगे. पहला खतरा तो उस जबर्दस्त झटके का था, जो पैराशूट के खुलते ही लगता था. आकाश से कूदने के फौरन बाद व्यक्ति का पैराशूट खुलता नहीं. धरती की दिशा में उसके गति फौरन तेज होती जाती है. जैसे ही पैराशूट खुलता, उसे झटका लगता. इससे हड्डी टूटने तक का डर होता था.

दूसरा खतरा था नीचे गिरते पैराशूट का पैंडुलम की तरह डोलना. इससे होता यह था कि कई बार पैराशूट इतना घूम जाता था जैसे छतरी पलट जाती है. उसमें भरी हवा निकल जाती और पैराशूट की शक्ल बिगड़ जाती. इसके कारण दुर्घटना का खतरा होता था. इन खतरों को देखते हुए पैराशूट में वेंटीलेटर छेद बनाए गए, जिनसे होकर हवा निकलती रहती है और पैराशूट न तो झटका देता है और न पैंडुलम की तरह घूमता है. इसके अलावा तह किया पैराशूट खुलने में भी आसानी होती है.

कंप्यूटर डिवाइस को माउस क्यों कहते हैं?

माउस का आविष्कार अमेरिकी वैज्ञानिक डगलस एंजेलबार्ट (Douglas Engelbart)  ने 1963 में किया था. यह आविष्कार की-बोर्ड युक्त पर्सनल कंप्यूटर के 1977 में हुए आविष्कार के काफी पहले हो गया. शुरू में एंजेलबार्ट ने इसके साथ लगा कॉर्ड इसके पीछे लगाया, जिसके कारण वह दुमदार चूहे जैसा लगने लगा. हालांकि बाद में कॉर्ड को आगे लगा दिया गया और अब तो बगैर कॉर्ड वाले माउस आ रहे हैं, पर इसे माउस कहना शुरू हुआ तो चलता ही रहा.

रेनबो डाइट क्या होती है?

रेनबो यानी इन्द्रधनुष के रंगों का भोजन. व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन है. फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है.

दुनिया में सात अजूबे

1.गीज़ा का विशाल पिरामिड (मिस्र), 2.बेबीलोन के झूलते बागीचे (इराक), 3.सिकन्दरिया का प्रकाश स्तम्भ (मिस्र), 4.ओलम्पिया में जियस की मूर्ति (यूनान), 5 हैलिकारनेसस का मकबरा (तुर्की), 6.आर्तिमिस का मंदिर (तुर्की), 7. रोड्‌स के कोलोसस की मूर्ति (यूनान).

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Sunday, July 23, 2017

विश्व जनसंख्या दिवस कब से मनाया जा रहा है?

विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य जनसंख्या सम्बंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जगाना है. यह 1987 से मनाया जा रहा है। 11 जुलाई, 1987 को विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार कर गई थी. तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने का निश्चय किया. अलबत्ता पहला विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1990 को 90 देशों में मनाया गया. इसके बाद दिसंबर 1990 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 45/216  पास करके हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला किया. तब से इस विशेष दिन को हर साल परिवार कल्याण का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा. विश्व की जनसंख्या और दुनिया के 20 देशों की जनसंख्या की नवीनतम स्थिति जानने के लिए आप इस वैबसाइट पर जाकर वर्ल्ड पॉपुलेशन मीटर देख सकते हैं http://www.worldometers.info/world-population/

ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के लिए क्या कोई आयु सीमा भी है?

ओलिंपिक चार्टर के अनुसार कोई आयु सीमा नहीं है. अलबत्ता अलग-अलग खेल संघों ने अपनी तरफ से आयु सीमाएं तय कर रखी हैं. मसलन जिम्नास्टिक्स में 16 साल के कम आयु के प्रतियोगी भाग नहीं ले सकते. सन 2016 के रियो ओलिंपिक में नेपाल की तैराक गौरिका सिंह ने 13 वर्ष की आयु में ओलिंपिक प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया. वे रियो में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं. ओलिंपिक खेलों के इतिहास में सबसे उम्रदराज प्रतिस्पर्धी थे स्वीडन के ऑस्कर स्वॉन, जिन्होंने 1920 की शूटिंग प्रतियोगिता में भाग लिया. उस वक्त उनकी उम्र थी 72 साल 281 दिन. रियो ओलिंपिक में उज्बेकिस्तान जिम्नास्ट ओक्साना चुसोवितीना सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी थीं. उनकी उम्र थी 41 वर्ष. वे सन 1992 के ओलिंपिक से लगातार भाग ले रहीं थीं.

हम अक्सर कहते हैं हाथ या पैर सो गया. यह क्या होता है?

इसे अंग्रेजी में Paresthesia कहते हैं, जिसके लिए हिंदी में शब्द हैं संवेदनशून्यता या अकड़ना. इसमें थोड़ी देर के लिए हाथ-पैर या शरीर का कोई दूसरा अंग निर्जीव हो जाता है या झनझनाहट होने लगती है. इसकी वजह है शरीर की किसी नाड़ी का दब जाना. जिस तरह शरीर में रक्त संचार के लिए धमनियाँ हैं, उसी तरह शरीर के अंगों का मस्तिष्क से संपर्क नाड़ी तंत्र के माध्यम से होता है. जब शरीर के किसी हिस्से पर लंबे अर्से तक दबाव पड़ता है तो धमनियों और नाड़ियों दोनों के काम प्रभावित होते हैं. जैसे ही दबाव हटता है सारी गतिविधियाँ फिर से शुरू हो जाती हैं.  

दो शहरों को जोड़ने वाली सड़कों को हाइवे क्यों कहते हैं?

हाइवे शब्द प्राचीन रोमन साम्राज्य की देन है. रोमन बादशाहों ने देश के 200 शहरों को सड़कों से जोड़ा था. ऐसी सड़कें पक्की होती थीं और इतनी अच्छी बनाई जाती थीं कि उनपर से होकर सेना के घुड़सवार दस्ते और रथ वगैरह आसानी से गुजर सकें. इन्हें जमीन की सामान्य सतह से कुछ ऊँचा बनाया जाता था ताकि दूर से दिखाई पड़ें और यदि कोई शत्रु हमला करना चाहता है तो वह दिखाई पड़े. बारिश के बाद इनमें पानी भी नहीं भरता था. इनकी ऊँचाई की वजह से इन्हें हाइवे कहा गया. बाद में सारी दुनिया में शहरों को जोड़ने वाली सड़कों को हाइवे कहा जाने लगा.

ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान कहाँ है?

द ग्रेट विक्टोरिया रेगिस्तान ऑस्ट्रेलियन रेगिस्तानों में से एक है. इस रेगिस्तान का क्षेत्रफल 338,000 वर्ग किमी है. इस रेगिस्तान की यह विशेषता है कि यहाँ वनस्पति बहुतायत से होती है. ब्रिटेन ने 1952 में जब एटम बम बनाया तो उसका परीक्षण यहाँ आकर किया.
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Sunday, July 16, 2017

विजिलांट कौन होते हैं?

अंग्रेजी में यह शब्द फ्रेंच शब्द vigilant से या सीधे लैटिन शब्द vigilantem  से आया है. इनका अर्थ है निगरानी, चौकसी वगैरह. हिस्पानी भाषा में vigilante का मतलब चौकीदार है. उन्नीसवीं सदी में अमेरिका में नागरिकों की सुरक्षा समितियों को विजिलांट कमेटी कहा जाता था.

यह शब्द हाल में गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के संदर्भ में इस्तेमाल हो रहा है. ऐसी मान्यता है कि सजग नागरिकों और सजग राजनेताओं के रहते लोकतंत्र में कोई ताकत जन-हित की उपेक्षा नहीं कर सकती. और यह भी कि सजग नागरिक फिर किसी भी हद तक जाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं, भले ही वे इसके लिए अधिकृत नहीं हों.

इस प्रवृत्ति को समर्थक कहते हैं कि जब समाज में न्याय व्यवस्था बची नहीं रहती या बेहद सुस्त होती है तब नागरिक सीधे हस्तक्षेप करते हैं. इसे भीड़ का न्याय भी कह सकते हैं. यह प्रवृत्ति राज-व्यवस्था के जन्म के पहले से चली आ रही है. मध्य युग में एशिया, अफ्रीका और यूरोप में ऐसे तमाम मिलते हैं जब भीड़ ने किसी को चोर या अपराधी बताकर मार डाला. लोक कथाओं में रॉबिनहुड और सुलताना डाकू की कहानियाँ प्रसिद्ध हैं, जो जनता के हित में कार्रवाई करते थे.

ऑडिटोरियम में ग्रीन रूम को ग्रीन रूम क्यों कहते हैं?

कहा जाता है कि सन 1599 में लंदन के ब्लैकफ्रायर्स थिएटर में मंच के ठीक पीछे उन कलाकारों के बैठने की व्यवस्था की गई, जिन्हें बाद में मंच पर जाना था. इस कमरे में हरे रंग की पुताई की गई थी. धीरे-धीरे सका नाम ग्रीन रूम हो गया. एक बात यह भी कही जाती है कि मंच की रोशनी से कलाकारों की आँखें चौंधिया जाती थीं. उन्हें कुछ आराम देने के लिए ऐसे कमरे को हरे रंग से पोतते थे.

मैकमोहन लाइन क्या होती है?-

यह भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है. सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत यह रेखा तय की गई थी. 1914 के बाद कई साल तक इस रेखा को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, पर 1937 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया. 1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था. इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमाहोन (Henry McMahon) के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी. वे भारत की तत्कालीन सरकार के विदेश सचिव थे. इसे मैकमाहोन रेखा कहना चाहिए, पर प्रचलन में मैकमोहन रेखा है.

क्या चींटियाँ सोती नहीं हैं?

ऐसा माना जाता था कि चीटियाँ सोती नहीं. पर वैज्ञानिक रिसर्च से पता लगा है कि उनके सोने का ढंग अलग है. जुलाई 2009 में द जरनल ऑफ इनसेक्ट बिहेवियर में में Deby L. Cassill, Skye Brown, Devon Swick and George Yanev के शोधपत्र में बताया गया कि चींटियों की एक प्रजाति फायर एंट जरीर सोती है. इनमें श्रमिक चीटियाँ 24 घंटे में करीब साढ़े चार घंटे और रानी चीटियाँ करीब साढ़े नौ घंटे सोती हैं. आमतौर पर चीटियाँ काम करते-करते एक से डेढ़ मिनट की झपकी लेती हैं. इस तरह वे चौबीस घंटे में दो सवा दो सौ बार सोती हैं. आप उन्हें गौर से देखें तो वे एक जगह थोड़ी देर के लिए ठहर जाती हैं. यही उनकी झपकी या नैप है.

क्षेत्रफल में सबसे बड़ा देश

श्रेणी में रूस सबसे बड़ा देश है. रूस का कुल क्षेत्र 1 करोड़ 70 लाख 98 हजार 242 वर्ग किलोमीटर है. दूसरे स्थान पर कनाडा है जिसका क्षेत्रफल 99 लाख, 46 हजार 670 वर्ग किलोमीटर है. पहले सात देशों की सूची इस प्रकार है: 1.रूस  1,70,98,242, 2.कनाडा 99,84,670, 3.संरा अमेरिका 96, 29, 091, 4.चीन 95,96,961, 5.ब्राजील 85,14,877, 6.ऑस्ट्रेलिया 76,92,024, 7.भारत 32,87,263.
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Thursday, July 6, 2017

हैक्टिविज़्म किसे कहते हैं?

हैक्टिविज़्म इंटरनेट से आया शब्द है, जो अंग्रेजी के एक्टिविज्म और हैकिंग के संयोग से बनाया गया है. किसी विचारधारा के प्रसार के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल हैक्टिविज़्म कहलाता है और इस काम को करने वाले हैक्टिविस्ट कहलाते हैं. यह शब्द सन 1994 में पहली बार कंप्यूटर हैकर ग्रुप कल्ट ऑफ द डैड काउ (सीडीसी) के सदस्य ओमेगा ने गढ़ा था. हैक्टिविज़्म शब्द का इस्तेमाल सायबर आतंकवाद के लिए भी इस्तेमाल होने लगा है. दूसरी ओर विकीलीक्स जैसे समूहों के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल चल रहा है. पश्चिमी देशों में इसे पूँजीवाद विरोधी विचारधारा का प्रमुख वाहक भी माना जा रहा है.
किंग आर्थर कौन थे?
किंग आर्थर एक ब्रिटिश महानायक का नाम है, जिनके बारे में कई तरह की किंवदंतियाँ हैं. कहा जाता है कि उन्होंने मध्ययुगीन इतिहास और कल्पित-कथा के अनुसार छठी शताब्दी के प्रारम्भ में सैक्सन हमलावरों के खिलाफ ब्रिटेन की सेना का नेतृत्व किया था. आर्थर का चरित्र मूलतः लोककथाओं और साहित्यिक रचनाओं में गढ़ा गया है. उनके ऐतिहासिक अस्तित्व को लेकर इतिहासकारों में विवाद और मतभेद हैं. यह नाम प्राचीन काव्यों में पहली बार आया था. बारहवीं सदी के ब्रिटिश धर्मगुरु ज्यॉफ्री मॉनमाउथ ने द हिस्ट्री ऑफ किंग्स ऑफ ब्रिटेन में उनका जिक्र किया है. लोककथाओं में उसके पहले भी ऐसे जादुई चरित्र का वर्णन मिलता है. ज्यॉफ्री ने वर्णन किया है कि आर्थर ब्रिटेन के राजा थे जिन्होंने सैक्संस को हराया था और ब्रिटेन, आयरलैंड, आइलैंड, नॉर्वे और गॉल में एक साम्राज्य की स्थापना की थी. उन्नीसवीं सदी में इस पात्र को जीवन मिला. बीसवीं सदी में थिएटर फिल्म, टीवी, कॉमिक्स और दूसरे मीडिया में किंग आर्थर के किस्से खूब चलने लगे.  
भारत का पहला विश्वविद्यालय?
प्राचीन भारत के तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया के प्राचीनतम विश्वविद्यालय हैं.  पर आधुनिक विश्वविद्यालयों के अर्थ में भारत का पहला विश्वविद्यालय कोलकाता में खुला. इसकी स्थापना 24 जनवरी 1857 को हुई. उसी साल मद्रास और मुम्बई की प्रेसीडेंसियों में भी विश्वविद्यालय खुले थे. कोलकाता विश्वविद्यालय से जुड़े चार विद्वानों को नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं. इनके नाम हैं-रोनाल्ड रॉस, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, सीवी रामन और अमर्त्य सेन.
ड्रैगन वास्तविक होता है या काल्पनिक?
ड्रैगन काल्पनिक प्राणी है. ज्यादातर सभी प्राचीन सभ्यताओं में ड्रैगन जैसे विशाल सर्प, अजगर या डायनोसॉर जैसे प्राणी की परिकल्पना मिलती है. ड्रैगन शब्द लैटिन के ड्रैको से बना है. साँप, अजगर जैसे चकत्तेदार खाल वाले, मगरमच्छ और घोड़े जैसे मुख और छिपकली जैसे पैर वाले प्राणी की परिकल्पना यूरोप के अलावा चीनी, जापानी, फारसी और संस्कृत साहित्य में भी मिलती है. यूरोप के ड्रैगन के शरीर में चमगादड़ जैसे डैने भी होते हैं. इधर डायनोसॉर जैसे शरीर वाले ड्रैगनों की तस्वीरों और खिलौनों की बाढ़ आई है. कुछ वास्तविकताओं और कुछ कल्पनाशीलता से बना ड्रैगन सम्भवतः: दुनिया का सबसे लोकप्रिय पात्र है.
माचिस कब बनी?
माचिस शब्द अंग्रेजी के मैच से आया है. इसका अर्थ है बत्ती या लैम्प की नोक. यूरोप में औद्योगिक क्रांति के दौरान सेल्फ इग्नाइटेड मैच की ईजाद हुई. पेरिस के प्रोफेसर के चैंसेल ने पोटेशियम क्लोरेट, गंधक, चीनी और रबर के घोल को लकड़ी में लपेटकर रोशन तीली 1805 में बनाई. उधर इंग्लैंड के केमिस्ट जॉन वॉकर ने 1826 ने पहली फ्रिक्शन मैच बनाई. इसमें एंटीमनी सल्फाइड, पोटेशियम क्लोरेट, गोंद और स्टार्च को लकड़ी पर लपेटा गया. सूखने के बाद इसे किसी खुरदुरी सतह पर रगड़ा गया तो आग पैदा हुई. सैमुअल जोन्स नाम के किन्हीं सज्जन ने इसे पेटेंट करा लिया. इसका नाम था ल्युसिफर मैच. नीदरलैंड्स में आज भी माचिस को ल्युसिफर कहते हैं.   
http://epaper.prabhatkhabar.com/1270447/Awsar/Awsar#page/6/1

Thursday, June 29, 2017

न्यूनतम समर्थन मूल्य किसे कहते हैं?

भारत में किसानों को उनकी उपज का ठीक मूल्य दिलाने और बाजार में कीमतों को गिरने से रोकने के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा करती है. कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों पर सरकार फसल बोने के पहले कुछ कृषि उत्पादों पर समर्थन मूल्य की घोषणा करती है. खासतौर से जब फसल बेहतर हो तब समर्थन मूल्य की जरूरत होती है.

देश में 26 कृषि उत्पादों पर सरकार समर्थन मूल्य घोषित करती है. इनमें सात अनाज, पाँच दलहन, आठ तिलहन के अलावा जटा वाले और छिले नारियल, कपास, जूट और तम्बाकू शामिल हैं. इसके अलावा गन्ने की कीमतें गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 के तय होती हैं. सत्तर के मध्य दशक तक दो तरह के मूल्य घोषित करती थी. एक, न्यूनतम समर्थन मूल्य, दो, खरीद मूल्य. पहले का उद्देश्य यह था कि बाजार में कीमतों को एक स्तर से नीचे न आने दिया जाए. दूसरे का उद्देश्य था सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम के वितरण के लिए एफसीआई जैसी सरकारी संस्थाओं द्वारा की जाने वाली रबी और खरीफ की खरीद का मूल्य तय करना.

सामान्यतः खरीद मूल्य बाजार मूल्य से नीचा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा होता था. इन दो कीमतों की नीति धान के मामले में 1973-74 तक जारी रही और गेहूँ के संदर्भ में 1969 में खत्म करने के बाद 1974-75 में एक साल के लिए फिर शुरू की गई. सन 1975-76 में बफर स्टॉक बनाने के लिए वर्तमान नीति शुरू की गई.

रेफ्रिजरेटर में कौन सी गैस डाली जाती है?

रेफ्रिजरेशन यानी फ्रिज और एयरकंडीशनरों में आमतौर पर फ्लुओरोकार्बंस, खासतौर से क्लोरोफ्लुओरोकार्बंस का इस्तेमाल होता था. इन्हें सीएफसी गैस कहा जाता है। इनका इस्तेमाल बंद हो गया है. ये गैसें ओज़ोन परत को नुकसान पहुँचाती हैं. अब हाइड्रोफ्लुओरोकार्बंस या एचएफसी का इस्तेमाल होने लगा है, जो शायद कम नुकसान पहुँचाती हैं. पर ज्यादातर ग्रीनहाउस गैसें जलवायु में परिवर्तन और धरती को गरम बनाती हैं. इन गैसों का उत्सर्जन एयरकंडीशनर, फ्रिज, कंप्यूटर, स्कूटर, कार आदि से है.

भारत में चंदन के पेड़ कहाँ पाए जाते हैं?

भारतीय चंदन का संसार में सर्वोच्च स्थान है. यह पेड़ मुख्यत: कर्नाटक के जंगलों में मिलता है तथा देश के अन्य भागों में भी कहीं-कहीं पाया जाता है. भारत के 600 से लेकर 900 मीटर तक कुछ ऊँचे स्थल और मलयद्वीप इसके मूल स्थान हैं. वृक्ष की आयुवृद्धि के साथ ही साथ उसके तनों और जड़ों की लकड़ी में सुगंधित तेल का अंश भी बढ़ने लगता है. इसकी पूर्ण परिपक्वता में 60 से लेकर 80 वर्ष तक का समय लगता है. इसके लिए ढलवाँ जमीन, जल सोखने वाली उपजाऊ चिकनी मिट्टी तथा 500 से लेकर 625 मिमी. तक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है.

विश्व की सबसे लम्बी कविता कौन सी है?

माना जाता है कि महाभारत दुनिया की सबसे लम्बी कविता है. इसमें दो लाख से ज्यादा श्लोक हैं. प्रसिद्ध ग्रीक महाकाव्य इलियाड और ओडिसी को एक साथ मिला लें तब भी महाभारत उनका दस गुना ग्रंथ साबित होगा.

सौरमंडल के ग्रहों और सूर्य के द्रव्यमान का अनुपात क्या है?

पूरे सौरमंडल का 99.86 प्रतिशत द्रव्यमान सूर्य में है. यानी शेष सभी ग्रह और उनके चन्द्रमा और उल्का पिंड मिलाकर 0.14 प्रतिशत हैं. उसके इसी द्रव्यमान के कारण उसकी गुरुत्व शक्ति है कि सारे ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित